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प्रतिमा या चित्र की स्थापना:- जिस देवता से संबंधित मंत्र का जप कर रहे हैं, उनकी प्रतिमा या चित्र अपने सामने रखें। जप आरंभ करने से पहले देवता की पूजा करें।
वज्र पानी पिबेच्चांगे डाकिनी डापिनी रक्षोव सर्वांगे।
साधक, अनुष्ठान, जप के बाद भी नियमित मंत्र जप करते रहें।
हम यहाँ वेबसाइट पर पूरी साधना नहीं डाल सकते क्योकि हमारी दी गई साधना गुरुमुखी साधना होती हे और हमने जो साधना सिद्ध करी हे वही ही डालते हे हमारी वेबसाइट से कई लोग यूट्यूब पर कॉपी करके डालते हे और हमारी साधना का गलत उपयोग कर रहे हे इसलिए आप सब साधक मित्रो को नम्र विनंती हे की आपको अगर साधना सीखनी हो तो आप हमारा कांटेक्ट कर सकते हो साधना लेने के लिए साधक को अपनी शक्ति अनुसार सेवा में योगदान करना पड़ेगा तब जाकर साधना मिलेगी.
जब ऐसा हो जाता है तो कहते हैं कि मंत्र सिद्ध हो गया। ऐसा मंत्र को लगातार जपते रहने से होता है। यदि आपका ध्यान इधर, उधर भटक रहा है तो फिर मंत्र को सिद्ध होने में भी विलंब होगा। कहते हैं कि 'करत-करत अभ्यास से जडमति होत सुजान। रसरी आवत-जात से सिल पर पड़त निसान॥'
मंत्र जप के दौरान अनुशासन:- मंत्र जाप करते समय मन को एकाग्र रखें। झूठ, क्रोध अथवा किसी भी चिंता से दूर रहें। साधना के दौरान धूम्रपान या अन्य नशा करना भी वर्जित है।
साधना काल में साधक अपने वस्त्र, जूठे बर्तन. आदि स्वयं साफ करें।
कोई साधक अगर किसी भी शक्ति की साधना करना चाहता हे या वशीकरण साधना या मोहिनी साधना करना चाहता है तो हम साधक को गुरुमुखी साधना देंगे और जब तक सिद्धि न मिले तब तक हम उसको मार्गदर्शन करेंगे सिद्धि प्रदान कराएंगे (महाकाली साधना नरसिंह साधना भैरव साधना कोई भी दस महाविधा की साधना यक्षणी साधना जिन्न साधना भूतनी साधना डाकिनी शाकीनी साधना वशीकरण साधना मोहिनी साधना और हमारे पास कई सारी गुप्त साधना हे जिसका जिक्र यहां नहीं कर सकते
साधना रात्रि के शान्त वातावरण में करें।
जानिए शाबर मंत्र पढ़ने के नियम, तांत्रिक परंपरा का हिस्सा है ये मंत्र
आसन का उपयोग:- कुश, ऊन, या रेशमी आसन पर बैठकर जाप करें। आसन का रंग सफेद, लाल या पीला more info होना शुभ माना जाता है।
शुद्धता और स्वच्छता का पालन:- मंत्र जाप से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। जाप के समय शारीरिक और मानसिक शुद्धता अनिवार्य है।
साधना काल में शुद्ध देशी घी का अखण्ड दीपक जलायें।
भोजन और आहार में संयम:- साधना के दौरान मांस, मदिरा और अन्य तामसिक पदार्थों का त्याग करें। सात्विक आहार ग्रहण करें।